भोपाल। भोपाल निवासी 97 वर्षीय शिक्षाविद् राजेश्वर प्रसाद माहेश्वरी का पार्थिव शरीर देहदान के तहत एम्स भोपाल को सौंपा गया। एम्स प्रशासन के अनुसार, माहेश्वरी ने करीब डेढ़ वर्ष पहले स्वयं देहदान का संकल्प लिया था और इसके लिए आवश्यक प्रपत्र भरकर सहमति दी थी। उनके निधन के बाद परिवार ने यह संकल्प पूरा किया।
पुत्र आईपीएस अधिकारी, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया
माहेश्वरी के पुत्र विपिन कुमार माहेश्वरी 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने और परिवार के अन्य सदस्यों ने देहदान की प्रक्रिया पूरी कराई। मध्य प्रदेश शासन के प्रोटोकॉल के अनुसार देहदाता को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद पार्थिव शरीर एम्स भोपाल लाया गया।
एम्स भोपाल प्रशासन ने बताया कि संस्थान की ओर से छात्रों और सदस्यों ने माहेश्वरी को श्रद्धांजलि दी और परिवार का आभार व्यक्त किया।
चार दशक का शिक्षण कार्य, 50 से अधिक किताबें
एम्स द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, माहेश्वरी दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के प्रिंसिपल के पद पर भी कार्यरत रहे। उन्होंने कानून और अकाउंटेंसी विषयों पर 50 से अधिक पाठ्यपुस्तकें लिखीं, जो सीनियर सेकेंडरी शिक्षा में इस्तेमाल होती रही हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 20 वर्षों तक जगन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (JIMS), दिल्ली के निदेशक के रूप में काम किया। वे ICAI, ICSI और ICWAI जैसे व्यावसायिक संस्थानों से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। इसके अलावा उन्होंने एक धर्मार्थ ट्रस्ट का संचालन किया, जो वंचितों के लिए धर्मशाला चलाता है। उनके परिवार में एक पुत्र और चार पुत्रियां हैं।
एम्स भोपाल की अपील
एम्स भोपाल प्रशासन ने कहा कि देहदान मेडिकल छात्रों के लिए शरीर-संरचना और उपचार संबंधी जानकारी सीखने का एक माध्यम है, जिससे वे आगामी वर्षों में मरीजों के इलाज में यह ज्ञान उपयोग करते हैं। संस्थान ने नागरिकों से देहदान के बारे में जानकारी प्राप्त करने और इस विषय में जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
— कारोबार समाचार ब्यूरो



